दोस्तो, शिक्षा तो सभी ग्रहण करना चाहते है, किंतु कोई यह जानना नही चाहता है कि “शिक्षा” क्या है? और यह किस प्रकार हमारे समाज से जुडी हुई है।
आज का यह लेख इसी पर आधारित है।
हम सभी अपने जीवन में शिक्षा ग्रहण करने के लिए उत्सुक रहते है। विद्यालय जाते है, किताबे पढ़ते है, अध्यापन करते है। हमें पढ़ाने के लिए हमारे माता – पिता भी बहुत मेहनत करते है, बहुत सारा धन भी खर्च करते है ताकि हम भविष्य में अच्छे पद पर विराजमान हो कर पैसे कमा सके और अपने जीवन को ऐशो आराम से गुजार सके।
लेकिन यही ऐशो आराम के चक्कर में लोग इंसानियत को ही भूल जाते है। लोग ये भी भूल जाते है, कि सही क्या है और गलत क्या है?
कुछ दिनों पहले की ही बात है। मेरा पुराना मित्र मनोज एक दिन सुबह – सुबह अचानक मेरे घर पहुँच गया, तो मैंने पूछा सब ठीक है न। तो उसने बताया कि – ”जब तक आपके पड़ोसी सुभास्कर जी जैसे इंसान जिन्दा रहेंगे तब तक कुछ ठीक नही हो सकता है” मैंने पूछा “क्या हो गया सीधे – सीधे बताओ भी।
उसने बताया की, वो एक नया व्यपार शुरू करने के लिए बैंक में 25 लाख रूपये के लिए लोन का आवेदन किया था। लोन की सारी प्रकिया समाप्त हो चुकी थी। परन्तु बस शाखा प्रबंधक द्वारा लोन पास करने की आखरी प्रकिया बाकी रह गयी थी । लेकिन शाखा प्रबंधक ने लोन को पास करने के लिए लोन की रकम का 10% उसे देने की मांग कर दी है, अगर मैंने इतने पैसे नही दिये तो शाखा प्रबंधक द्वारा लोन को रद्द कर दिया जायेगा।
फिर मनोज ने बताया कि इसलिए मैं तुम्हारे पास आया हूँ, अगर तुम कहोगे तो वो कुछ कम कर मेरे लोन को पास कर देंगे। यह सुनकर मैं हैरान था, कि सुभास्कर जी भी ऐसा कर सकते हैं। उससे ज्यादा हैरानी इस बात पर थी कि कोई चंद रुपयों के लिए इंसानियत को क्यों भूल जाते है।
चलिए...
आपको आज “शिक्षा” से परिचित करता हूँ।
- क्या शिक्षा केवल जीवन में पैसे कमाने के लिए दी जाती है ?
- क्या आजकल शिक्षा का अर्थ केवल यही रह गया है कि जैसे-तैसे एक पद पर विराजमान हो जाओ और गलत ढंग से पैसे कमाओ ?
- क्या आज शिक्षा केवल व्यपार बनकर रह गया है,पैसा लगाओ और पैसा पाओ चाहे वो जैसे भी आये कोई फर्क नही पड़ता ?
- माना आप इस तरह से पैसे कमा भी लेते है, तो क्या आप चैन से रह पायेंगे ?
अगर आप इसी तरह कि सोच रखते है तो आप न ही समाज के अंग है न ही आपने कभी शिक्षा ग्रहण की है। क्योंकि शिक्षा इस तरह के घिनौना कार्य करने के लिए किसी को भी प्रोत्साहित नही करती है।
इसलिए शिक्षा ग्रहण करने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि “शिक्षा” क्या है? और यह समाज से किस प्रकार जुड़ी है?
चलिए...
आपको आज “शिक्षा” से परिचित करता हूँ।
“अनुसाशन और प्यार से विद्या द्वारा मानवों का चरित्र निर्माण करना, जिससे वह अपने परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व का उद्धार कर सके, यही वास्तविक शिक्षा है”
लेकिन आजकल सामाजिक पहलू में शिक्षा का मतलब ही बदल गया है। क्योंकि हमलोगों ने सोचने का तरीका बदल दिया है। आजकल हर एक व्यक्ति अपनी पढाई को जल्दी-जल्दी पूरा कर एक अच्छी नौकरी लेकर बस किसी तरह फिट हो जाना चाहता है, उससे उसे कोई मतलब नही है, कि उसने -
- क्या पढ़ा ?
- कितना पढ़ा ?
- क्यों पढ़ा ?
- जितना पढ़ा उसका जीवन में कितना प्रयोग होगा ?
उन्हें तो बस शिक्षा के Investment के Return से मतलब है | अब तो शिक्षा भी सिर्फ जीवन में पैसे कमाने के लिए दी जाने लगी है | इन सब में इन विद्यार्थियों का ही केवल दोष नही है | क्योंकि ये सीख कहीं न कहीं उनके माता-पिता या उनके मित्रों द्वारा ही उनको मिलते है | “जल्दी से पढ़-लिख लो तो खूब पैसे कमाना ” माता-पिता अपने बच्चों से ये शब्द इस तरह कहते है, जैसे उनका बच्चा पढ़-लिख कर पैसा कमाने की मशीन ही बन जायेगा | क्या यही है रह गया है शिक्षा का उद्देश्य ? क्या हम इसी सोच से अपने समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी भागीदारी निभा सकते है ? यदि यही शिक्षा का उद्देश्य है तो शिक्षा शब्द का अर्थ भी बदल देना चाहिए |
“आज का समाज शिक्षा के मूलरूप के विनाश की ओर अग्रसर है |” क्योंकि “आज शिक्षा समाज को नही समाज शिक्षा को प्रभावित कर रही है |” अगर आज शिक्षा के स्वरुप को बदलना है तो, परीक्षा के प्रारूप में आमूल परिवर्तन करने की गुंजाइश है | क्योंकि “परीक्षा से केवल यह तय किया जा सकता है कि आप कितना याद किये है, पर यह तय नही किया जा सकता है कि आप कितना सीखे है |” इसलिए शिक्षा पद्धति को दुरुस्त करने के लिए परीक्षा के प्रारूप को बदलना अति आवश्यक है | ”अगर बेहतर समाज का निर्माण करना है तो बेहतर शिक्षा पद्धति का होना आवश्यक है क्योंकि समाज का निर्माण व्यक्तियों के समूह द्वारा होता है | अगर प्रत्येक व्यक्तियो का सही शिक्षा मिले तो समाज भी बेहतर होगा | कहा जाये तो ये सभी चीजे एक दूसरे के ही पूरक है – “जिस प्रकार बेहतर परीक्षा पद्धति बेहतर शिक्षा पद्धति का निर्माण करती है ठीक उसी प्रकार बेहतर शिक्षा पद्धति का निर्माण करती है |” By – Shahrukh

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